ज्ञानेंद्र इंदौरकर छिंदवाड़ा
*छिन्दवाड़ा – जय भीम सेना सामाजिक संगठन के संयुक्त तत्वाधान में आज जिले के दलित समुदाय के विभिन्न पुलिस प्रशासन के लोगों द्वारा एफ.आई.आर.दर्ज नहीं की जा रही है और जो एफ.आई.आर.दर्ज की जा रही है उसमें जिले के रसूखदारों लोगों को बचाया जा रहा है जिसमें आज संगठन के द्वारा महामहिम राष्ट्रपति महोदया एवं महामहिम राज्यपाल महोदय व जिला पुलिस अधीक्षक जी को सैकड़ों की तादाद में ज्ञापन सौंपा गया है जिले के दलित समुदाय को न्याय मिल सके। मुख्य मामला पीड़िता का आरोप सुरेश डोंगरे निवासी जैतपुर खुर्द के है जो कि दलित समुदाय से आते है 4-5 दिन पहले वहीं के दबंग लोगों के द्वारा उनको व उनकी पत्नि व बेटी के साथ मारपीट की गयी । पीडित का आरोप है कि पुलिस चौकी उमरानाला द्वारा रसूखदारों को बचाया जा रहा है एवं जान से मारने की धमकी दे रहे है। दूसरा मामला पीड़ित बबलू कनौजे निवासी चंदनगांव ये भी दलित समुदाय से आते है कि इनके जान पहचान के व्यक्ति को इन्होंने शोकेस सामग्री ,कम्प्यूटर ,पिं्रटर ,लैपटॉप उपयोग हेतु दिया था जिसकी शिकायत कोतवाली थाना छिन्दवाड़ा में करने के बाद भी आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। तीसरा मामला राजेन्द्र डेहरिया निवासी मंडला पोस्ट पल्टवाड़ा ,थाना शिवपुरी ,पीड़ित परिवार का आरोप है कि 4-5 दिन पहले वहॉं के स्थानीय 25-30 लोगों के द्वारा घर में घुसकर मारपीट की गयी थी जिसकी शिकायत शिवपुरी थाने में दर्ज की गयी लेकिन एक ही व्यक्ति के नाम पर दर्ज की गयी जबकि अन्य लोगों के विरूद्ध एस.सी.एसटी एक्ट के तहत कार्यवाही होना था पीड़ित विकलांग है उनके सिर ,पीछे रीढ़ की हड्डी आदि जगह चोट है और वर्तमान में जिला चिकित्सालय छिन्दवाड़ा में भर्ती हैं। चौथा मामला निशांत रविकर जो कि बजरंग नगर के रहने वाला है इन्होंने एक वर्ष पूर्व खुद की ट्रेक्टर ट्रॉली मानियाखापा में राजा नामक व्यक्ति को किराये पर दिया था जिसने ना ही ट्रेक्टर दिया ना ही उसको किराया दिया जिसकी शिकायत देहात थाना व पुलिस अधीक्षक कार्यालय को की गयी हैं लेकिन आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी और ना ही एफ.आई.आर. दर्ज की गयी ।एक ओर तो प्रदेश सरकार दलित शोषित वंचित समुदाय को संरक्षित करने की बात करती है तो वहीं दूसरी ओर उन्हीं लोगों को
जिले में पुलिस प्रशासन द्वारा न्याय नहीं मिल पा रहा है। पीड़ितों को न्याय नहीं मिलने की स्थिति में संगठन
आगे पुलिस प्रशासन के खिलाफ संवैधानिक तौर पर उग्र आंदोलन करने को मजबूर रहेगा। जिसकी समस्त जबावदारी शासन प्रशासन की होगी। जिसमें मुख्य रूप से शिवम् पहाडे़ ,लोधी विपिन वर्मा ,मिथुन धुर्वे ,राजकुमार खड़से ,मोहरू पटेल ,गणपत यदुवंशी ,सीताराम सरेयाम ,दिनेश इनवाती ,किशोर वंशकार ,पप्पू गोनेकर ,रमेश बेले ,कृष्णा पहाडे़ ,परवेज खान ,धर्मेन्द्र सोनेकर ,संजय विश्वकर्मा, पप्पू मंडराह, पारस वंशकार ,सोनू गौहरे ,सागर परतेती ,रंजीत रविकर ,बबलू कनौजे ,मनीष मृदुलकर ,अधिवक्ता अजय करोले , राकेश टेकाम ,राजा गुन्हेरे ,अरविंद मोहबे ,आकाश पाल ,सुरेश डोंगरे ,संजय बाक्सर ,अमन जाम्बुलकर ,सोनू मंडराह ,करन वाडिवा, आदि सैकड़ों की संख्या में संगठन व समाज के लोग उपस्थित थे ।