एक माह की मासूम बच्ची की र्निमम हत्या करने वाली माता को हुई आजीवन कारावास की सजा
श्रीमती सुधाविजय सिंह भदौरिया, भोपाल ने बताया कि आज दिनांक 27/02/2025 को माननीय न्यायालय श्री अतुल सक्सेना 23वे अपर सत्र न्यायाधीश महोदय, के द्वारा एक माह की मासूम बच्ची की निर्मम हत्या करने वाली आरोपिया माता सरिता मेवाडा को धारा 302, भादवि मे दोषसिद्ध पाते हुये आरोपिया सरिता मेवाडा को धारा 302 भादवि मे आजीवन कारावास एवं 1,000 रू अर्थदण्ड से दण्डित किये जाने का निर्णय पारित किया है । उक्त प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती सुधाविजय सिंह भदौरिया द्वारा पैरवी की गई है।
घटना का संक्षिप्त विवरण :-
विशेष लोक अभियोजक श्रीमती भदौरिया ने बताया कि दिनांक-16.09.2020 को समय करीब 11:00 बजे घटनास्थल से मृतिका किंजल की मां सरिता बाई ने बाहर आकर बताया कि किंजल को चारपाई पर लेटा दिया था जो चारपाई पर नहीं है। उस समय वहां पर सरिता के अलावा अन्य कोई व्यक्ति नहीं था जो बाद में तलाशने पर करीबन 04:00 बजे, घर के अंदर रखी पानी से भरी टंकी में मृत अवस्था में पाई गयी। घटनास्थल कमरे के अंदर जाने के दो दरवाजे थे जिसमें से एक बंद था व दूसरे दरवाजे पर स्वयं मृतिका की मां सरिता थीं। मृतिका के पिता सचिन मेवाडा ने अपने कथन में बताया कि उसने अपनी पत्नी सरिता से पूछताछ किया तो वह रोने लगी एवं बोली कि उसने ही अपनी लडकी किंजल उम्र एक माह को पानी की टंकी में डालकर ढक्कन बंद कर दिया था। सरिता ने सोचा था कि उसे लडका होगा, किंतु लडकी हुई तो उसे लडकी से कोई प्रेम नहीं था। वह जब-जब उसे देखती थी तो अपने आप को कोसने लगती थी। इसलिये उस समय घर में कोई नहीं होने का मौका पाकर किंजल को पानी की टंकी में डालकर ढक्कन बंद कर दिया और डर के कारण किसी को यह बात नहीं बतायी। उक्त घटना के आधार पर पुलिस थाना खूजरी सडक मे मर्ग क्रमांक 40/20 पंजीबद्ध कर मर्ग जॉच उपरान्त आरोपिया के विरूद्ध अपराध क्रमांक 451/2020 धारा 302 भादवि मे प्रथम सूचना रिपोर्ट लेख बद्ध की गई, अन्वेषण के दौरान घटना स्थल से साक्ष्य एकत्रित कर सम्पूर्ण विवेचना उपरान्त अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया । सम्पूर्ण प्रकरण परिस्थितिजन साक्ष्य एवं मृतिका और उसकी माता को अन्तिम बार एक साथ देखे जाने की साक्ष्य पर आधारित था माननीय न्यायालय द्वारा निर्णय पारित करते हुये अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य, तर्क एवं न्यायदृष्टांतों से सहमत होते हुऐ आरोपिया को दोषसिद्ध कर धारा 302 भादवि मे आजीवन कारावास एवं 1,000 रू अर्थदण्ड से दण्डित किये जाने का निर्णय पारित किया है
माननीय न्यायालय द्वारा मे प्रकरण 104 पेज का निर्णय पारित करते हुये विशेष टिप्पणी दी गई वर्तमान मे पुत्रियॉं सभ्यता, सस्ंकृति व राष्ट्र निर्माण का सशक्त हस्ताक्षर है। शास्त्रों मे पुत्रियों को हद्रयों का बंधन, भावों का स्पंदन, सृजन का आधार, भक्ति का आकार और संस्कृति का संस्कार माना गया है। वर्तमान मे भारत जैसे विकसित राष्ट्र मे पुत्रियों को साहस, सृजन, सेवा, सभ्यता, सौंदर्य एवं शक्ति के पुंज के रूप मे देखा जा रहा है। माननीय न्यायालय द्वारा अपने निर्णय मे श्री रविन्द्र नाथ टैगारे जी की पंक्तियों को भी समाहित किया है- ‘’जब एक पुत्री का जन्म होता है तो यह इस बात का निश्चायक सबूत है, कि ईश्वर मानव जाति से अप्रसन्न नहीं है, क्योंकि ईश्वर पुत्रियों के माध्यम से स्वयं को साकार रूप देता है।‘’