कलेक्ट्रेट कार्यालय से लगे हुए जिला पंचायत कार्यालय में लोकायुक्त सागर द्वारा जिला ऑडिट ऑफिस को 4 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत का सामाजिक अंकेक्षण किया जाता है। इसके लिए बाकायदा पंचायत में बीएससी पहुंचकर पंचायत का सामाजिक अंकेक्षण कर अपनी रिपोर्ट जिला समन्वयक सामाजिक अंकेक्षण जिला पंचायत को देता है।
इस संबंध में पीड़ित ने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा पैसे ना देने पर रिपोर्ट वापस कर दी जाती थी या रिपोर्ट जमा करके रिपोर्ट के संबंध में नोटिस जारी किए जाते थे क्योंकि हम लोगों के पास रिपोर्ट देने की पावती नहीं होती थी जिस कारण से जिलाधिकारी अपनी मनमानी कर रहे थे। इसी बात से पीड़ित होकर उन्होंने इस बात की शिकायत लोकायुक्त सागर में की थी।
वहीं आरोपी हर चरण वर्मा उर्फ हरचरण सेन का कहना है कि उनके द्वारा किसी भी प्रकार की कोई राशि की मांग नहीं की गई। वह हमेशा ही हमसे कभी 1000 कभी 2000 रुपये उधार मांग कर ले जाता था तो मैं समझा की उधारी के पैसे वापस कर रहा है। इस कारण से मैंने यह राशि ले ली। मेरे द्वारा किसी भी प्रकार की रिश्वत की मांग नहीं की गई। इस संपूर्ण कार्यवाही में प्रधान आरक्षक महेश हजारी, आरक्षक विक्रम सिह, सुरेंद्र सिंह, आशुतोष व्यास,अरविंद नायक आदि की भूमिका रही।