प्रदीप गुप्ता/नर्मदापुरम/ आरक्षी केन्द्र अजाक नर्मदापुरम् के अपराध क्रमांक 34/2007 में आरोपी छोटेवीर पिता शेरसिंह गूजर निवासी ग्राम अजेरा थाना सोहागपुर जिला नर्मदापुरम का प्रकरण विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1908 नर्मदापुरम् (म.प्र.) में विचाराधीन था। जिसमें न्यायाधीश जे. पी. सिंह द्वारा निर्णश पारित करते हुए आरोपी को दोषी मानते हुए दस वर्ष के सश्रम कारावास एवं 2000.00 के अर्थदंड से दंडित किया। शासन की ओर से पैरवी केशवसिंह चौहान द्वारा की गई । श्री चौहान द्वारा बताया कि अभियोक्त्री ने दिनांक 09.0.2007 को थाना अजाक नर्मदापुरम में इस आशय की लिखित शिकायत पेश की थी कि यह अजेरा थाना पिपरिया की निवासी है तथा मेहनत मजदूरी करने पालन पोषण करती है। बुधवार की रात को उसका आदमी नया टोला में हाकनसिंह गूजर के घर सोने गया था। वह घर की दहजान में खटिया पर सो रही थी और उसके बच्चे बालिया में तो रहें थे कि रात करीब एक बजे की बात है उसका पड़ोसी छोटेवीर गूजर आया और उसे जगाकर उसके मुंह को रूमाल से बंद कर उसे अंदर घर में ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती दुरा काम किया और बोला कि अगर चिल्लायी और किसी को बतायेगी तो जान से खत्म कर दूंगा। छांटेवीर गूजर बुरा काम करके भागने लगा तो फिर वह चिल्लाई तो उसके ककिया ससुर ने उसे भागते हुए देखा। सुबह यह बात उसने अपने आदमी को आने पर बताई तथा ससुर को भी बताया। उक्त रिपोर्ट के आधार पर आरोपी के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर अनुसंधान कार्यवाही पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रकरण उपार्पित होकर प्राप्त होने पर प्रका विशेष प्रकरण कमांक: 174/07 पंजीबद्ध किया गया । जिसका विचारण विशेष न्यायाधीश जे.पी. सिंह के समक्ष किया गया। प्रकरण में आरोपी वर्ष 2007 से फरार था तथा उसका स्थाई वारंट जारी था जो पन्द्रह वर्ष बाद बमुश्किल गिरफ्तार हुआ। न्यायालय द्वारा प्रकरण में विचारण उपरांत अरोपी छोटेवीर पिता शेरसिंह गूजर निवासी ग्राम अजेरा थाना सोहागपुर जिला नर्मदापुरम् के विरुद्ध भादवि की धारा 450 एवं धारा 376 का अपराध प्रमाणित पाया जाकर अभियुक्त को धारा 450 भादंस के तहत 17 वर्ष के सश्रम कारावास एवं धारा 376 भादंस के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 2000.00 के अर्थ दंड से दंडित किया गया । अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने दशा में 02 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास से दंडित किये जाने के आदेश जारी किये गये ।