सीमा कैथवास की रिपोर्ट –
नर्मदापुरम । शासकीय नर्मदा महाविधालय में सत्र के उत्तरार्ध में विशेष संगोष्ठी रखी गई ।जिसमें इंटर्नशिप, फील्ड प्रोजेक्ट, सामुदायिक जुडाव परियोजना ,मूल्यांकन आदि पर विमर्श किया गया। जिसका उद्देश्य सत्र में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ एन ई पी के पाठ्यक्रम अनुसार चतुर्थ और पंचम प्रश्न पत्र का महत्व, प्रशिक्षण और परीक्षा पैटर्न की गंभीरता छात्रों तक पहुंचाना रहा। प्राचार्य डॉ ओ एन चौबे ने अध्यक्षता करते हुए संगोष्ठी में कहा कि न्यू एजुकेशन पॉलिसी में विद्यार्थियों को व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए विभिन्न संस्थानों में भेजा जाना है जो विषय क्षेत्र को समझने के लिए आवश्यक है ये प्रशिक्षण प्रायोगिक अनुभव के साथ डिग्री कोर्स से मिलने वाली शिक्षा को वास्तविक और व्यवहारिक ज्ञान से जोड़ते हैं । विद्यार्थी परेशान ना हो इसके लिए हेल्प डेस्क की पूर्व में ही व्यवस्था की जा चुकी है। उन्होंने सभी प्राध्यापकों को निर्देशित भी किया कि छात्र संख्या को देखते हुए महाविद्यालय का वातावरण सकारात्मक और अनुशासित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। नियमित विद्यार्थियों को कक्षाओं में पढ़ाई के साथ जानकारी दी जाए । नई शिक्षा नीति के परीक्षा पैटर्न और मूल्यांकन के बारे में मॉडल परीक्षा की समय सारणी भी निर्धारित की गई। डॉ आर एस बोहरे, प्रोफेसर जी पी रैकवार, डॉ जे के कमल पुरिया आदि प्रभारियों से प्रशिक्षण और क्षेत्र कार्य पर विचार विमर्श किया गया। डॉ बी सी जोशी, एस सी हर्ने, डॉ संजय चौधरी, डॉ विनीता अवस्थी, डॉ के जी मिश्र, डॉ कमल वाधवा, डॉ हंसा व्यास , डॉ अमिता जोशी, डॉ वाय एस चाहर, डॉ कमल चौबे, डॉ सविता गुप्ता, डॉ एस के उदयपुरे, डॉ बी एल राय, डॉ मीना कीर, डॉ प्रीति आनंद, डॉ अडलक, डॉ दिनेश श्रीवास्तव, डॉ अंजना यादव सहित समस्त वरिष्ठ और कनिष्ठ प्राध्यापक उपस्थित रहे।